कुरान - 28:63 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

63
قَالَ ٱلَّذِينَ حَقَّ عَلَيۡهِمُ ٱلۡقَوۡلُ رَبَّنَا هَـٰٓؤُلَآءِ ٱلَّذِينَ أَغۡوَيۡنَآ أَغۡوَيۡنَٰهُمۡ كَمَا غَوَيۡنَاۖ تَبَرَّأۡنَآ إِلَيۡكَۖ مَا كَانُوٓاْ إِيَّانَا يَعۡبُدُونَ

Transliteration: (Qaalal lazeena haqqa 'alaihimul qawlu Rabbanaa haaa'ulaaa'il lazeena aghwainaa aghwainaahu kamaa ghawainaa tabarraanaaa ilaika maa kaanoo iyyaanaa ya'budoon)

वे लोग जिन पर बात साबित हो चुकी होगी कहेंगे, 'ऐ हमारे रब! ये वे लोग हैं जिन्हें हमने गुमराह किया था [161]; हमने उन्हें उसी तरह बहकाया जैसे हम ख़ुद गुमराह हुए थे [162]; हम तेरी बारगाह में इनसे बेज़ारी ज़ाहिर करते हैं, ये हमारी इबादत नहीं करते थे [163]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 63 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 63

"वे लोग जिन पर बात साबित हो चुकी होगी कहेंगे, 'ऐ हमारे रब! ये वे लोग हैं जिन्हें हमने गुमराह किया था [161]; हमने उन्हें उसी तरह बहकाया जैसे हम ख़ुद गुमराह हुए थे [162]; हम तेरी बारगाह में इनसे बेज़ारी ज़ाहिर करते हैं, ये हमारी इबादत नहीं करते थे [163]।'"

[161] गुमराही के पेशवाओं का इक़रार

काफ़िरों और शैतानों के सरदार कहेंगे कि हाँ हमने इन्हें बहकाया था, मगर हमने इन पर कोई ज़बरदस्ती नहीं की थी।

[162] मुश्तरका गुमराही

वे उज़्र पेश करेंगे कि जिस तरह हम अपनी मर्ज़ी से गुमराह हुए थे, उसी तरह ये भी अपनी ख़्वाहिश से हमारे पीछे चले थे; इसमें हमारा कोई ज़ोर न था।

[163] पैरोकारों से बेज़ारी का इज़हार

वे अपने पैरोकारों से साफ़ मुकर जाएंगे और कहेंगे कि हम इनसे बेज़ार हैं, ये हक़ीक़त में अपनी ही नफ़्सानी ख़्वाहिशों की इबादत करते थे।

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