कुरान - 28:61 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

61
أَفَمَن وَعَدۡنَٰهُ وَعۡدًا حَسَنٗا فَهُوَ لَٰقِيهِ كَمَن مَّتَّعۡنَٰهُ مَتَٰعَ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا ثُمَّ هُوَ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ مِنَ ٱلۡمُحۡضَرِينَ

Transliteration: (Afamanw wa'adnaahu wa'dan hasanan fahuwa laaqeehi kamam matta'naahu mataa'al hayaatid dunyaa summa huwa Yawmal Qiyaamati minal muhdareen)

भला क्या वह शख़्स जिससे हमने अच्छा वादा (जन्नत का) किया है और वह उसे पाने वाला है [158], उस शख़्स जैसा हो सकता है जिसे हमने दुनियावी ज़िंदगी का थोड़ा सा फ़ायदा दिया, फिर क़यामत के दिन वह (अज़ाब के लिए) पेश किया जाएगा [159]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 61 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 61

"भला क्या वह शख़्स जिससे हमने अच्छा वादा (जन्नत का) किया है और वह उसे पाने वाला है [158], उस शख़्स जैसा हो सकता है जिसे हमने दुनियावी ज़िंदगी का थोड़ा सा फ़ायदा दिया, फिर क़यामत के दिन वह (अज़ाब के लिए) पेश किया जाएगा [159]?"

[158] मोमिनीन के लिए जन्नत का अच्छा वादा

इस आयत में दो गिरोहों का मुवाज़ना फ़रमाया गया: एक वह मोमिन जिससे अल्लाह तआला ने अपने फ़ज़्ल से जन्नत, मग़फ़िरत और दायमी नेमतों का सच्चा वादा फ़रमाया है और वह क़ियामत में ज़रूर अपनी आँखों से उसे देखेगा और उससे लुत्फ़-अंदोज़ होगा।

[159] काफ़िरों की आरज़ी दौलत और आख़िरत की ज़िल्लत

दूसरा वह काफ़िर जिसे दुनिया की चंद रोज़ा लज़्ज़तें और ऐश अता की गईं, मगर क़ियामत के दिन वह हथकड़ियों और बेड़ियों में जकड़कर अज़ाब के लिए अदालत-ए-इलाही में पेश किया जाएगा। भला ये दोनों कभी बराबर हो सकते हैं!

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