कुरान - 28:60 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

60
وَمَآ أُوتِيتُم مِّن شَيۡءٖ فَمَتَٰعُ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَزِينَتُهَاۚ وَمَا عِندَ ٱللَّهِ خَيۡرٞ وَأَبۡقَىٰٓۚ أَفَلَا تَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Wa maaa ooteetum min shai'in famataa'ul hayaatid dunyaa wa zeenatuhaa; wa maa 'indal laahi khairunw wa abqaa; afalaa ta'qiloon (section 6))

और तुम्हें जो कुछ भी दिया गया है वह तो बस दुनियावी ज़िंदगी का फ़ायदा और उसकी ज़ीनत है [157]; और जो कुछ अल्लाह के पास है वह कहीं बेहतर और हमेशा बाक़ी रहने वाला है; तो क्या तुम अक़्ल से काम नहीं लेते? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 60 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 60

"और तुम्हें जो कुछ भी दिया गया है वह तो बस दुनियावी ज़िंदगी का फ़ायदा और उसकी ज़ीनत है [157]; और जो कुछ अल्लाह के पास है वह कहीं बेहतर और हमेशा बाक़ी रहने वाला है; तो क्या तुम अक़्ल से काम नहीं लेते?"

[157] दुनिया की आरज़ी नेमतें बनाम आख़िरत की दायमी दौलत

दुनिया की दौलत, हुकूमत, औलाद और ज़ीनत सब चंद रोज़ा और आरज़ी (फ़ानी) हैं जो मौत के साथ ही ख़त्म हो जाएंगी। इसके बरअक्स जो नेमतें अल्लाह के पास जन्नत में अहले ईमान के लिए तैयार हैं, वे हमेशा रहने वाली और बे-मिसाल हैं। अक़्लमंद वही है जो फ़ानी के बदले दायमी को चुने।

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