Transliteration: (Wa maaa ooteetum min shai'in famataa'ul hayaatid dunyaa wa zeenatuhaa; wa maa 'indal laahi khairunw wa abqaa; afalaa ta'qiloon (section 6))
"और तुम्हें जो कुछ भी दिया गया है वह तो बस दुनियावी ज़िंदगी का फ़ायदा और उसकी ज़ीनत है [157]; और जो कुछ अल्लाह के पास है वह कहीं बेहतर और हमेशा बाक़ी रहने वाला है; तो क्या तुम अक़्ल से काम नहीं लेते?"
दुनिया की दौलत, हुकूमत, औलाद और ज़ीनत सब चंद रोज़ा और आरज़ी (फ़ानी) हैं जो मौत के साथ ही ख़त्म हो जाएंगी। इसके बरअक्स जो नेमतें अल्लाह के पास जन्नत में अहले ईमान के लिए तैयार हैं, वे हमेशा रहने वाली और बे-मिसाल हैं। अक़्लमंद वही है जो फ़ानी के बदले दायमी को चुने।
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