कुरान - 28:58 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
وَكَمۡ أَهۡلَكۡنَا مِن قَرۡيَةِۭ بَطِرَتۡ مَعِيشَتَهَاۖ فَتِلۡكَ مَسَٰكِنُهُمۡ لَمۡ تُسۡكَن مِّنۢ بَعۡدِهِمۡ إِلَّا قَلِيلٗاۖ وَكُنَّا نَحۡنُ ٱلۡوَٰرِثِينَ

Transliteration: (Wa kam ahlaknaa min qaryatim batirat ma'eeshatahaa fatilka masaakinuhum lam tuskam mim ba'dihim illaa qaleelaa; wa kunnaa Nahnul waariseen)

और हमने कितनी ही बस्तियों को हलाक कर दिया [149] जो अपनी मआश (ऐश व इशरत की ज़िंदगी) पर इतरा उठी थीं [150]! तो ये हैं उनके मकानात [151] जो उनके बाद बहुत ही कम आबाद रहे [152], और हम ही (आख़िरकार सबके) वारिस हैं [153]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 58

"और हमने कितनी ही बस्तियों को हलाक कर दिया [149] जो अपनी मआश (ऐश व इशरत की ज़िंदगी) पर इतरा उठी थीं [150]! तो ये हैं उनके मकानात [151] जो उनके बाद बहुत ही कम आबाद रहे [152], और हम ही (आख़िरकार सबके) वारिस हैं [153]।"

[149] नाफ़रमान बस्तियों की हलाकत

इतिहास गवाह है कि बहुत सी क़ौमें दौलत और ताक़त के घमंड में अल्लाह के अहकाम से फिर गईं, तो अल्लाह के अज़ाब ने उन्हें नेस्त-ओ-नाबूद कर दिया।

[150] ऐश-परस्ती और तकब्बुर

दौलत और नेमतों पर इतराना और ख़ुदा को भूल जाना हलाकत का सबसे बड़ा सबब है।

[151] बर्बादशुदा बस्तियों के खंडरात

उनके आलीशान महल और खंडरात आज भी इबरत का सामान बने खड़े हैं।

[152] वीरान मकानात

उन बस्तियों के हलाक होने के बाद वे मकानात वीरान हो गए, सिवाय इसके कि कोई मुसाफ़िर थोड़ी देर के लिए साया हासिल करने बैठ जाए।

[153] हक़ीक़ी वारिस अल्लाह की ज़ात

तमाम मख़लूक़ फ़ना हो जाएगी और पूरी कायनात और सल्तनतों का तन्हा वारिस सिर्फ़ अल्लाह तआला रहेगा।

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