Transliteration: (Wa kam ahlaknaa min qaryatim batirat ma'eeshatahaa fatilka masaakinuhum lam tuskam mim ba'dihim illaa qaleelaa; wa kunnaa Nahnul waariseen)
"और हमने कितनी ही बस्तियों को हलाक कर दिया [149] जो अपनी मआश (ऐश व इशरत की ज़िंदगी) पर इतरा उठी थीं [150]! तो ये हैं उनके मकानात [151] जो उनके बाद बहुत ही कम आबाद रहे [152], और हम ही (आख़िरकार सबके) वारिस हैं [153]।"
इतिहास गवाह है कि बहुत सी क़ौमें दौलत और ताक़त के घमंड में अल्लाह के अहकाम से फिर गईं, तो अल्लाह के अज़ाब ने उन्हें नेस्त-ओ-नाबूद कर दिया।
दौलत और नेमतों पर इतराना और ख़ुदा को भूल जाना हलाकत का सबसे बड़ा सबब है।
उनके आलीशान महल और खंडरात आज भी इबरत का सामान बने खड़े हैं।
उन बस्तियों के हलाक होने के बाद वे मकानात वीरान हो गए, सिवाय इसके कि कोई मुसाफ़िर थोड़ी देर के लिए साया हासिल करने बैठ जाए।
तमाम मख़लूक़ फ़ना हो जाएगी और पूरी कायनात और सल्तनतों का तन्हा वारिस सिर्फ़ अल्लाह तआला रहेगा।
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