कुरान - 28:57 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

57
وَقَالُوٓاْ إِن نَّتَّبِعِ ٱلۡهُدَىٰ مَعَكَ نُتَخَطَّفۡ مِنۡ أَرۡضِنَآۚ أَوَلَمۡ نُمَكِّن لَّهُمۡ حَرَمًا ءَامِنٗا يُجۡبَىٰٓ إِلَيۡهِ ثَمَرَٰتُ كُلِّ شَيۡءٖ رِّزۡقٗا مِّن لَّدُنَّا وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Wa qaalooo in nattabi'il hudaa ma'aka nutakhattaf min ardinaa; awalam numakkkil lahum haraman aaminany yujbaaa ilaihi samaraatu kulli shai'ir rizqam mil ladunnaa wa laakinna aksarahum laa ya'lamoon)

और वे कहते हैं, 'अगर हम आपके साथ इस हिदायत की पैरवी करें, तो हम अपनी ज़मीन से उचक लिए (निकाल फेंके) जाएंगे [147]।' क्या हमने उन्हें अम्न वाले हरम में जगह नहीं दी जिसकी तरफ़ हर क़िस्म के फल हमारी तरफ़ से रोज़ी बनकर खिंचे चले आते हैं? लेकिन उनमें से अक्सर लोग नहीं जानते [148]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 57 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 57

"और वे कहते हैं, 'अगर हम आपके साथ इस हिदायत की पैरवी करें, तो हम अपनी ज़मीन से उचक लिए (निकाल फेंके) जाएंगे [147]।' क्या हमने उन्हें अम्न वाले हरम में जगह नहीं दी जिसकी तरफ़ हर क़िस्म के फल हमारी तरफ़ से रोज़ी बनकर खिंचे चले आते हैं? लेकिन उनमें से अक्सर लोग नहीं जानते [148]।"

[147] दुनियावी नुक़सान का झूठा बहाना

कुरैश के मुशरिकीन कहते थे कि हम जानते हैं कि आपका दीन सच्चा है, मगर हमें डर है कि अगर हमने अरबों के बुत छोड़ दिए तो सारा अरब मुत्तहिद होकर हम पर हमला कर देगा और हमें मक्का से बे-दख़ल कर देगा।

[148] हरम-ए-काबा का अम्न और ग़ैबी रिज़्क़

अल्लाह तआला ने उनकी इस बेबुनियाद दलील को रद्द फ़रमाया कि जिस हरम को अल्लाह ने पूरे अरब की जंगों और ख़ूंरेज़ियों के दरमियान दारुल-अम्न बना दिया और जहाँ बे-आबो-गयाह वादी होने के बावजूद दुनिया भर की नेमतें और फल खिंचे चले आते हैं, क्या वह अल्लाह अपने दीन पर चलने वालों की हिफ़ाज़त नहीं फ़रमाएगा!

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