Transliteration: (Wa izaa sami'ul laghwa a'radoo 'anhu wa qaaloo lanaaa a'maalunaa wa lakum a'maalukum salaamun 'alaikum laa nabtaghil jaahileen)
"और जब वे कोई बे-हूदा (फ़ुज़ूल) बात सुनते हैं, तो उससे मुंह फेर लेते हैं [141] और कहते हैं, 'हमारे लिए हमारे आमाल हैं और तुम्हारे लिए तुम्हारे आमाल [142]; तुम पर सलामती हो, हम जाहिलों (के तरीक़े) को नहीं चाहते [143]।'"
मोमिन की यह शान है कि वह गाली-गलौज, बेहूदा बातों और फ़ुज़ूल झगड़ों में अपना वक़्त बर्बाद नहीं करता बल्कि इज़्ज़त के साथ किनाराकशी इख़्तियार करता है।
वे साफ़ फ़रमाते हैं कि हर शख़्स अपने अमल का ख़ुद ज़िम्मेदार है, हमें हमारे अच्छे आमाल की जज़ा मिलेगी और तुम्हें तुम्हारी सरकशी की सज़ा।
यहाँ 'सलाम' से मुराद तहिय्यत (मुलाक़ात का सलाम) नहीं, बल्कि रुख़्सती और अमन का सलाम है कि हम तुम्हारी जिहालत का जवाब जिहालत से नहीं देना चाहते।
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