Transliteration: (Ulaaa'ika yu'tawna ajrahum marratayni bimaa sabaroo wa yadra'oona bil hasanatis saiyi'ata wa mimmmaa razaq naahum yunfiqoon)
"ये वे लोग हैं जिन्हें उनका अज्र दोहरी मर्तबा दिया जाएगा [138], उनके सब्र करने के बाइस [139]; और वे बुराई को भलाई से दूर करते हैं [140] और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से ख़र्च करते हैं।"
हदीस शरीफ़ में आता है कि तीन क़िस्म के लोगों को दोहरा अज्र मिलेगा: एक वह अहले किताब जो अपने नबी पर भी ईमान लाया और हुज़ूर अकरम ﷺ पर भी ईमान लाया।
अपनी पिछली क़ौम की मलामत और मुख़ालिफ़त के बावजूद हक़ पर डटे रहने की वजह से उन्हें यह बुलन्द मर्तबा अता हुआ।
वे जाहिलों की सख़्ती और बद-कलामी का जवाब हिल्म, सब्र और हुस्ने सुलूक से देते हैं।
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