कुरान - 28:54 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
أُوْلَـٰٓئِكَ يُؤۡتَوۡنَ أَجۡرَهُم مَّرَّتَيۡنِ بِمَا صَبَرُواْ وَيَدۡرَءُونَ بِٱلۡحَسَنَةِ ٱلسَّيِّئَةَ وَمِمَّا رَزَقۡنَٰهُمۡ يُنفِقُونَ

Transliteration: (Ulaaa'ika yu'tawna ajrahum marratayni bimaa sabaroo wa yadra'oona bil hasanatis saiyi'ata wa mimmmaa razaq naahum yunfiqoon)

ये वे लोग हैं जिन्हें उनका अज्र दोहरी मर्तबा दिया जाएगा [138], उनके सब्र करने के बाइस [139]; और वे बुराई को भलाई से दूर करते हैं [140] और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से ख़र्च करते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 54

"ये वे लोग हैं जिन्हें उनका अज्र दोहरी मर्तबा दिया जाएगा [138], उनके सब्र करने के बाइस [139]; और वे बुराई को भलाई से दूर करते हैं [140] और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से ख़र्च करते हैं।"

[138] दोहरा अज्र व सवाब

हदीस शरीफ़ में आता है कि तीन क़िस्म के लोगों को दोहरा अज्र मिलेगा: एक वह अहले किताब जो अपने नबी पर भी ईमान लाया और हुज़ूर अकरम ﷺ पर भी ईमान लाया।

[139] सब्र व इस्तिक़ामत

अपनी पिछली क़ौम की मलामत और मुख़ालिफ़त के बावजूद हक़ पर डटे रहने की वजह से उन्हें यह बुलन्द मर्तबा अता हुआ।

[140] बुराई का जवाब भलाई से देना

वे जाहिलों की सख़्ती और बद-कलामी का जवाब हिल्म, सब्र और हुस्ने सुलूक से देते हैं।

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