कुरान - 28:52 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
ٱلَّذِينَ ءَاتَيۡنَٰهُمُ ٱلۡكِتَٰبَ مِن قَبۡلِهِۦ هُم بِهِۦ يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Allazeena aatainaahu mul Kitaaba min qablihee hum bihee yu'minoon)

जिन लोगों को हमने इससे पहले किताब अता फ़रमाई थी, वे इस (क़ुरआन) पर ईमान लाते हैं [136]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 52

"जिन लोगों को हमने इससे पहले किताब अता फ़रमाई थी, वे इस (क़ुरआन) पर ईमान लाते हैं [136];"

[136] अहले किताब के सच्चे मोमिनीन

इससे मुराद अहले किताब के वे नेक और मुन्सिफ़ मिज़ाज उलमा हैं (जैसे हज़रत अब्दुल्लाह बिन सलाम और नजाशी के साथी) जो तौरात व इंजील के असल अहकाम पर क़ायम थे। जब उन्होंने हुज़ूर ﷺ की नबुव्वत को पहचाना तो बिला-झिझक ईमान ले आए।

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