Transliteration: (Wa laqad wassalnaa lahumul qawla la'allahum yatazakkaroon)
"और बेशक हमने उनके लिए कलाम को पै-दर-पै (लगातार) पहुंचाया [135] ताकि वे नसीहत हासिल करें।"
अल्लाह तआला ने क़ुरआन मजीद को तेईस साल के अर्से में थोड़ा-थोड़ा करके, ज़रूरतों और वाक़िआत के मुताबिक़ लगातार नाज़िल फ़रमाया ताकि लोगों के दिलों में हिकमत व नसीहत अच्छी तरह उतर सके और वे ग़ौर-ओ-फ़िक्र कर सकें।
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