कुरान - 28:51 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
۞وَلَقَدۡ وَصَّلۡنَا لَهُمُ ٱلۡقَوۡلَ لَعَلَّهُمۡ يَتَذَكَّرُونَ

Transliteration: (Wa laqad wassalnaa lahumul qawla la'allahum yatazakkaroon)

और बेशक हमने उनके लिए कलाम को पै-दर-पै (लगातार) पहुंचाया [135] ताकि वे नसीहत हासिल करें। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 51

"और बेशक हमने उनके लिए कलाम को पै-दर-पै (लगातार) पहुंचाया [135] ताकि वे नसीहत हासिल करें।"

[135] कलाम-ए-इलाही का मुसलसल नुज़ूल

अल्लाह तआला ने क़ुरआन मजीद को तेईस साल के अर्से में थोड़ा-थोड़ा करके, ज़रूरतों और वाक़िआत के मुताबिक़ लगातार नाज़िल फ़रमाया ताकि लोगों के दिलों में हिकमत व नसीहत अच्छी तरह उतर सके और वे ग़ौर-ओ-फ़िक्र कर सकें।

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