कुरान - 28:49 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
قُلۡ فَأۡتُواْ بِكِتَٰبٖ مِّنۡ عِندِ ٱللَّهِ هُوَ أَهۡدَىٰ مِنۡهُمَآ أَتَّبِعۡهُ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ

Transliteration: (Qul faatoo bi Kitaabim min 'indil laahi huwa ahdaa minhu maaa attabi'hu in kuntum saadiqeen)

आप कह दीजिए, 'फिर तुम अल्लाह के पास से कोई ऐसी किताब ले आओ जो इन दोनों (तौरात व क़ुरआन) से बढ़कर हिदायत वाली हो [131], मैं उसी की पैरवी करूँगा, अगर तुम सच्चे हो [132]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 49

"आप कह दीजिए, 'फिर तुम अल्लाह के पास से कोई ऐसी किताब ले आओ जो इन दोनों (तौरात व क़ुरआन) से बढ़कर हिदायत वाली हो [131], मैं उसी की पैरवी करूँगा, अगर तुम सच्चे हो [132]!'"

[131] क़ुरआन और तौरात की अफ़ज़लियत

अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ के ज़रिए मुनकिरीन को चैलेंज दिया कि अगर तुम्हारे ख़्याल में ये दोनों किताबें जादू हैं, तो तुम रू-ए-ज़मीन से कोई ऐसी किताब पेश कर दो जो इनसे बढ़कर हिदायत और हक़ पर मबनी हो!

[132] बातिल का आजिज़ होना

क़यामत तक तमाम कायनात मिलकर भी क़ुरआन की एक सूरत जैसी मिसाल पेश करने से आजिज़ है।

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