कुरान - 28:47 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
وَلَوۡلَآ أَن تُصِيبَهُم مُّصِيبَةُۢ بِمَا قَدَّمَتۡ أَيۡدِيهِمۡ فَيَقُولُواْ رَبَّنَا لَوۡلَآ أَرۡسَلۡتَ إِلَيۡنَا رَسُولٗا فَنَتَّبِعَ ءَايَٰتِكَ وَنَكُونَ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Wa law laaa an tuseebahum museebatum bimaa qaddamat aideehim fa yaqooloo Rabbanaa law laaa arsalta ilainaa Rasoolan fanattabi'a Aayaatika wa nakoona minal mu'mineen)

और अगर यह बात न होती कि उन पर उनके अपने हाथों के भेजे हुए करतूतों की वजह से कोई मुसीबत आ पड़ती [123] तो वे कहते, 'ऐ हमारे रब! तूने हमारी तरफ़ कोई रसूल क्यों न भेजा कि हम तेरी आयात की पैरवी करते [124] और ईमान वालों में से हो जाते [125]?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 47

"और अगर यह बात न होती कि उन पर उनके अपने हाथों के भेजे हुए करतूतों की वजह से कोई मुसीबत आ पड़ती [123] तो वे कहते, 'ऐ हमारे रब! तूने हमारी तरफ़ कोई रसूल क्यों न भेजा कि हम तेरी आयात की पैरवी करते [124] और ईमान वालों में से हो जाते [125]?'"

[123] करतूतों के सबब अज़ाब

अगर काफ़िरों को उनके कुफ़्र व शिर्क की वजह से रसूल भेजने से पहले ही पकड़ लिया जाता, तो वे क़ियामत में बहाना बनाते।

[124] हुज्जत तमाम करना

अल्लाह तआला ने रसूलुल्लाह ﷺ को भेजकर उन पर हुज्जत तमाम फ़रमा दी ताकि कोई यह न कह सके कि हमारे पास कोई नबी नहीं आया जो हमें हक़ समझाता।

[125] ईमान का झूठा दावा

वे दुनिया में कहते थे कि अगर नबी आता तो हम सबसे पहले ईमान लाते, मगर जब नबी आ गए तो अपनी हठधर्मी से मुकर गए।

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