कुरान - 28:45 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
وَلَٰكِنَّآ أَنشَأۡنَا قُرُونٗا فَتَطَاوَلَ عَلَيۡهِمُ ٱلۡعُمُرُۚ وَمَا كُنتَ ثَاوِيٗا فِيٓ أَهۡلِ مَدۡيَنَ تَتۡلُواْ عَلَيۡهِمۡ ءَايَٰتِنَا وَلَٰكِنَّا كُنَّا مُرۡسِلِينَ

Transliteration: (Wa laakinnaa anshaanaa quroonan fatataawala 'alaihimul 'umur; wa maa kunta saawiyan feee ahli Madyana tatloo 'alaihim Aayaatinaa wa laakinnaa kunnaa mursileen)

लेकिन हमने बहुत सी नस्लें पैदा कीं फिर उन पर तवील ज़माना गुज़र गया [119]; और न आप मदयन वालों में रहने वाले थे कि उन पर हमारी आयात पढ़कर सुनाते, लेकिन हम ही रसूल भेजने वाले थे [120]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 45

"लेकिन हमने बहुत सी नस्लें पैदा कीं फिर उन पर तवील ज़माना गुज़र गया [119]; और न आप मदयन वालों में रहने वाले थे कि उन पर हमारी आयात पढ़कर सुनाते, लेकिन हम ही रसूल भेजने वाले थे [120];"

[119] नस्लों का गुज़रना और दीनी अहकाम का भुलाना

हज़रत मूसा के बाद सदियाँ गुज़र गईं और लोगों ने उनके अहकाम और शरीअत को भुला दिया और किताबों में तहरीफ़ कर दी। क़ुरआन मजीद को अल्लाह ने कयामत तक महफ़ूज़ फ़रमाया है।

[120] मदयन के वाक़िआत का इल्म

आप मदयन में हज़रत शुऐब और हज़रत मूसा के दरमियान मौजूद न थे, फिर भी इन वाक़िआत को बिल्कुल ठीक-ठीक बयान करना अल्लाह की अता कर्दा वही और इल्म-ए-ग़ैब का मोजिज़ा है।

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