Transliteration: (Wa laqad aatainaa Moosal Kitaaba mim ba'di maaa ahlaknal quroonal oolaa basaaa'ira linnaasi wa hudanw wa rahmatal la'allahum yata zakkkaroon)
"और बेशक हमने पहली नस्लों को हलाक करने के बाद मूसा को किताब (तौरात) अता फ़रमाई [115], जो लोगों के लिए बसीरत (रौशनी), हिदायत और रहमत थी ताकि वे नसीहत हासिल करें [116]।"
क़ौमे नूह, आद, समूद और फ़िरऔनियों जैसी पुरानी उम्मतों को हलाक फ़रमाने के बाद अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा को तौरात अता फ़रमाई। इसके बाद किसी पूरी उम्मत पर आम अज़ाब (आसमानी हलाकत) नहीं भेजा गया बल्कि जिहाद का हुक्म हुआ।
तौरात लोगों के दिलों के लिए बसीरत व बीनाई, सही रास्ते की हिदायत और मोमिनीन के लिए अल्लाह की ख़ास रहमत थी।
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