कुरान - 28:42 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

42
وَأَتۡبَعۡنَٰهُمۡ فِي هَٰذِهِ ٱلدُّنۡيَا لَعۡنَةٗۖ وَيَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ هُم مِّنَ ٱلۡمَقۡبُوحِينَ

Transliteration: (Wa atba'naahum fee haazihid dunyaa la'natanw wa Yawmal Qiyaamati hum minal maqbooheen (section 4))

और हमने इस दुनिया में उनके पीछे लानत लगा दी [113], और क़यामत के दिन वे निहायत बदहाल (ज़लील व रुसवा) लोगों में से होंगे [114]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 42 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 42

"और हमने इस दुनिया में उनके पीछे लानत लगा दी [113], और क़यामत के दिन वे निहायत बदहाल (ज़लील व रुसवा) लोगों में से होंगे [114]।"

[113] दुनिया में लानत और फ़िटकार

दुनिया में कयामत तक हर ज़माने के लोग फ़िरऔन और उसके लश्कर पर लानत भेजते रहेंगे और उनका नाम ज़ुल्म व सरकशी की अलामत बनकर रह गया।

[114] आख़िरत में ज़िल्लत व रुसवाई

क़ियामत के दिन उनके चेहरे बदसूरत, काले और कुरुप कर दिए जाएंगे और वे अल्लाह की रहमत से हमेशा के लिए महरूम और रुसवा होंगे।

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