कुरान - 28:40 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
فَأَخَذۡنَٰهُ وَجُنُودَهُۥ فَنَبَذۡنَٰهُمۡ فِي ٱلۡيَمِّۖ فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلظَّـٰلِمِينَ

Transliteration: (Fa akhaznaahu wa junoo dahoo fanabaznaahum fil yammi fanzur kaifa kaana 'aaqibatuz zaalimeen)

तो हमने उसे और उसके लश्करों को पकड़ लिया, फिर उन्हें दरिया (समंदर) में फेंक दिया [110]; पस देख लो कि ज़ालिमों का अंजाम कैसा हुआ [111]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 40

"तो हमने उसे और उसके लश्करों को पकड़ लिया, फिर उन्हें दरिया (समंदर) में फेंक दिया [110]; पस देख लो कि ज़ालिमों का अंजाम कैसा हुआ [111]!"

[110] फ़िरऔन और उसके लश्कर का दरिया में ग़र्क़ होना

जब हज़रत मूसा बनी इसराईल को लेकर निकले तो फ़िरऔन अपने पूरे लश्कर के साथ तआक़ुब में आया। अल्लाह तआला ने दरिया-ए-क़ुलज़ुम (लाल सागर) में रास्ते बना दिए; बनी इसराईल सलामती से पार उतर गए और जब फ़िरऔनी दरिया के बीच पहुंचे तो पानी वापस मिल गया और वे सब के सब ग़र्क़ होकर हलाक हो गए।

[111] ज़ालिमों के अंजाम से इबरत

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि देखो ज़ुल्म, तकब्बुर और नाफ़रमानी का कैसा ख़ौफ़नाक अंजाम हुआ! दुनिया की कोई ताक़त उन्हें अल्लाह की पकड़ से न बचा सकी।

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