कुरान - 28:39 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
وَٱسۡتَكۡبَرَ هُوَ وَجُنُودُهُۥ فِي ٱلۡأَرۡضِ بِغَيۡرِ ٱلۡحَقِّ وَظَنُّوٓاْ أَنَّهُمۡ إِلَيۡنَا لَا يُرۡجَعُونَ

Transliteration: (Wastakbara huwa wa junooduhoo fil ardi bighairil haqqi wa zannooo annahum ilainaa laa yurja'oon)

और उसने और उसके लश्करों ने ज़मीन में नाहक़ तकब्बुर किया [108], और उन्होंने समझा कि वे हमारी तरफ़ कभी पलटाए नहीं जाएंगे [109]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 39

"और उसने और उसके लश्करों ने ज़मीन में नाहक़ तकब्बुर किया [108], और उन्होंने समझा कि वे हमारी तरफ़ कभी पलटाए नहीं जाएंगे [109]।"

[108] ज़मीन में नाहक़ तकब्बुर व ग़ुरूर

फ़िरऔन और उसके सरदारों ने मिस्र की हुकूमत और फ़ौजी ताक़त के घमंड में ख़ुदा के बंदों पर ज़ुल्म किया और ख़ुद को अफ़ज़ल समझा। तकब्बुर सिर्फ़ अल्लाह की ज़ात-ए-किबरिया को ज़ेब देता है, बशर का तकब्बुर नाहक़ और ज़ुल्म है।

[109] आख़िरत और हिसाब का इनकार

उनकी सरकशी का असल सबब यह था कि वे आख़िरत, क़ब्र से उठने और अल्लाह की अदालत में पेश होने के मुनकिर थे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now