कुरान - 28:38 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
وَقَالَ فِرۡعَوۡنُ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلۡمَلَأُ مَا عَلِمۡتُ لَكُم مِّنۡ إِلَٰهٍ غَيۡرِي فَأَوۡقِدۡ لِي يَٰهَٰمَٰنُ عَلَى ٱلطِّينِ فَٱجۡعَل لِّي صَرۡحٗا لَّعَلِّيٓ أَطَّلِعُ إِلَىٰٓ إِلَٰهِ مُوسَىٰ وَإِنِّي لَأَظُنُّهُۥ مِنَ ٱلۡكَٰذِبِينَ

Transliteration: (Wa qaala Fir'awnu yaaa aiyuhal mala-u maa 'alimtu lakum min ilaahin ghairee fa awqid lee yaa Haamaanu 'alatteeni faj'al lee sarhal la'alleee attali'u ilaaa ilaahi Moosaa wa innee la azunnuhoo minal kaazibeen)

और फ़िरऔन ने कहा, 'ऐ दरबारी सरदारों! मैं तो अपने सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं जानता; पस ऐ हामान! मेरे लिए मिट्टी (की ईंटें) पकाओ, फिर मेरे लिए एक बुलंद महल (मीनार) बनाओ [105] ताकि मैं मूसा के माबूद को झांक कर देखूँ [106], और बेशक मैं तो उसे झूठों में से समझता हूँ [107]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 38

"और फ़िरऔन ने कहा, 'ऐ दरबारी सरदारों! मैं तो अपने सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं जानता; पस ऐ हामान! मेरे लिए मिट्टी (की ईंटें) पकाओ, फिर मेरे लिए एक बुलंद महल (मीनार) बनाओ [105] ताकि मैं मूसा के माबूद को झांक कर देखूँ [106], और बेशक मैं तो उसे झूठों में से समझता हूँ [107]।'"

[105] हामान को ईंटें पकाकर मीनार बनाने का हुक्म

फ़िरऔन ने तकब्बुर में आकर ख़ुदाई का दावा किया और अपने वज़ीर हामान को हुक्म दिया कि आग में ईंटें पकाकर एक इंतिहाई बुलंद मीनार तामीर करे। रिवायत में आता है कि हामान ने पचास हज़ार मज़दूर लगाकर एक ऐसा गगनचुंबी मीनार बनाया जिसकी मिसाल न थी।

[106] आसमान के ख़ुदा को देखने का ढोंग

फ़िरऔन ने अवाम को मुग़ालता देने के लिए कहा कि मैं उस मीनार पर चढ़कर मूसा के ख़ुदा को देखूँगा। हालांकि वह जानता था कि ख़ुदा जिस्म और मक़ान से पाक है, मगर वह अपनी जाहिल रिआया को धोखे में रखना चाहता था।

[107] हज़रत मूसा को झुठलाने का अज़्म

उसने बदबख़्ती से ऐलान किया कि मैं तो मूसा को झूठा समझता हूँ और आसमान में कोई ख़ुदा नहीं।

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