कुरान - 28:37 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
وَقَالَ مُوسَىٰ رَبِّيٓ أَعۡلَمُ بِمَن جَآءَ بِٱلۡهُدَىٰ مِنۡ عِندِهِۦ وَمَن تَكُونُ لَهُۥ عَٰقِبَةُ ٱلدَّارِۚ إِنَّهُۥ لَا يُفۡلِحُ ٱلظَّـٰلِمُونَ

Transliteration: (Wa qaala Moosaa Rabbeee a'alamu biman jaaa'a bilhudaa min 'indihee wa man takoonu lahoo 'aaqibatud daari innahoo laa yuflihuz zaalimoon)

और मूसा ने कहा, 'मेरा रब ख़ूब जानता है उसे जो उसकी तरफ़ से हिदायत लेकर आया है और जिसके लिए आख़िरत का अच्छा अंजाम होगा [103]; बेशक ज़ालिम कभी फ़लाह (कामयाबी) नहीं पाते [104]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 37

"और मूसा ने कहा, 'मेरा रब ख़ूब जानता है उसे जो उसकी तरफ़ से हिदायत लेकर आया है और जिसके लिए आख़िरत का अच्छा अंजाम होगा [103]; बेशक ज़ालिम कभी फ़लाह (कामयाबी) नहीं पाते [104]।'"

[103] सच्चे रसूल और नेक अंजाम का इल्म

हज़रत मूसा ने फ़रमाया कि मुझे तुम्हारे तानों की कोई परवाह नहीं, मेरा रब ख़ूब जानता है कि कौन सच्चा रसूल है और आख़िरत में जन्नत और इज़्ज़त का मुक़ाम किसे मिलने वाला है।

[104] ज़ालिमों की नाकामी

जो लोग अल्लाह की आयात को झुठलाते हैं और शिर्क करते हैं, वे ज़ालिम हैं और ज़ालिम कभी आख़िरत में कामयाब नहीं हो सकते।

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