कुरान - 28:62 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

62
وَيَوۡمَ يُنَادِيهِمۡ فَيَقُولُ أَيۡنَ شُرَكَآءِيَ ٱلَّذِينَ كُنتُمۡ تَزۡعُمُونَ

Transliteration: (Wa Yawma yunaadeehim fa-yaqoolu aina shurakaaa 'iyal lazeena kuntum taz'umoon)

और जिस दिन वह उन्हें पुकारेगा तो फ़रमाएगा, 'कहाँ हैं मेरे वे शरीक जिनका तुम दावा करते थे [160]?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 62 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 62

"और जिस दिन वह उन्हें पुकारेगा तो फ़रमाएगा, 'कहाँ हैं मेरे वे शरीक जिनका तुम दावा करते थे [160]?'"

[160] मुशरिकीन को डांट-डपट और मलामत

क़ियामत के दिन अल्लाह तआला मुशरिकीन से यह सवाल मालूमात के लिए नहीं, बल्कि उन्हें शर्मिंदा और रुसवा करने के लिए फ़रमाएगा कि आज वे बुत और झूठे माबूद कहाँ हैं जिन्हें तुम दुनिया में मेरा शरीक ठहराते थे और समझते थे कि वे तुम्हें अज़ाब से बचा लेंगे!

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