Transliteration: (Muttaki'eena 'alaihaa mutaqabileen)
"उन पर आमने-सामने तकिया लगाए बैठे होंगे [18]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अहले जन्नत के दिलों में कोई कीना या बुग़्ज़ न होगा, वे सब बाहम शीरो-शकर होकर आमने-सामने गोल हल्क़े में बैठेंगे। इसी सुन्नत और जन्नती तरीक़े की वजह से दुनिया में भी दरस-ओ-तदरीस और ज़िक्र-ओ-नाअत के हल्क़े आमने-सामने बैठकर लगाए जाते हैं।
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