मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 14 तफ़सीर
मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)
सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 14
"और पिछलों में से थोड़े [16]!"
[16] बाद वाली नस्लों में मुक़र्रबीन की तादाद और उम्मत-ए-मुहम्मदिया की फ़ज़ीलत
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:
मुक़र्रबीन का तनासुब: मुक़र्रबीन के आला मक़ाम पर बाद के ज़माने के लोग निस्बतन कम होंगे, अगरचे असहाबुल यमीन (आम जन्नतियों) की तादाद बहुत ज़्यादा होगी।
उम्मत का कभी गुमराह न होना: हदीस-ए-पाक से साबित है कि हुज़ूर ﷺ की उम्मत में क़यामत तक ऐसे कामिल औलिया और बुज़ुर्ग मौजूद रहेंगे जो हक़ पर क़ायम रहेंगे और अल्लाह के मुक़र्रब होंगे।
जन्नत में अक्सरीयत: हदीस शरीफ़ में है कि जन्नतियों की 120 सफ़ें होंगी जिनमें से 80 सफ़ें सिर्फ़ उम्मत-ए-मुहम्मदिया की होंगी।
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