Transliteration: (Izaa waqa'atil waaqi'ah)
"जब वह होने वाली (क़यामत) वाक़ेअ हो जाएगी [2]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'वाक़िआ' से मुराद क़यामत का दिन है। चूँकि क़यामत का बरपा होना एक अटल, यक़ीनी और यकलख़्त पेश आने वाला वाक़िया है, इसलिए इस सूरह का नाम 'अल-वाक़िआ' रखा गया। क़ुरआन मजीद में क़यामत के कई नाम आए हैं, और 'वाक़िआ' उसकी हतमियत और अज़ीम इंकि़लाब को ज़ाहिर करता है।
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