कुरान - 56:4 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
إِذَا رُجَّتِ ٱلۡأَرۡضُ رَجّٗا

Transliteration: (Izaa rujjatil ardu rajjaa)

जब ज़मीन सख़्ती से हिला दी जाएगी [6]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 4

"जब ज़मीन सख़्ती से हिला दी जाएगी [6]!"


[6] ज़मीन का भयानक ज़लज़ला

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि तफ़सीर रूहुल मआनी में है कि इस रोज़ ऐसा भयानक ज़लज़ला आएगा कि ज़मीन की तमाम इमारतें और महल्लात ज़मींदोज़ हो जाएँगे और ज़मीन अपने अंदर के तमाम ख़ज़ाने और मुर्दों को बाहर उगल देगी।

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