Transliteration: (Laisa liwaq'atihaa kaazibah)
"तो उसके वाक़ेअ होने में किसी के झुठलाने की कोई गुंजाइश न होगी [3]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जब क़यामत अपनी तमाम हौलनाकियों के साथ ज़ाहिर हो जाएगी, तो हर काफ़िर और मुनकिर भी अपनी आँखों से देखकर उस पर यक़ीन करने पर मजबूर हो जाएगा। मगर उस वक़्त का मानना और तस्लीम करना किसी काम न आएगा, क्योंकि ईमान तो ग़ैब पर लाने का नाम था।
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