Transliteration: (Fakaanat habaaa'am mumbassaa)
"फिर वे उड़ते हुए ग़ुबार (ज़र्रे) हो जाएँगे [8]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि सूर की भयानक गूँज और बाहम टकराने से वे पहाड़ ऐसे बारीक ग़ुबार बन जाएँगे जैसे रौशनदान से आने वाली धूप की किरण में बारीक ज़र्रे उड़ते नज़र आते हैं।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat