कुरान - 56:6 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
فَكَانَتۡ هَبَآءٗ مُّنۢبَثّٗا

Transliteration: (Fakaanat habaaa'am mumbassaa)

फिर वे उड़ते हुए ग़ुबार (ज़र्रे) हो जाएँगे [8]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 6

"फिर वे उड़ते हुए ग़ुबार (ज़र्रे) हो जाएँगे [8]!"


[8] सूर की भयानक आवाज़ और पहाड़ों का ग़ुबार बनना

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि सूर की भयानक गूँज और बाहम टकराने से वे पहाड़ ऐसे बारीक ग़ुबार बन जाएँगे जैसे रौशनदान से आने वाली धूप की किरण में बारीक ज़र्रे उड़ते नज़र आते हैं।

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