Transliteration: (Fa as haabul maimanati maaa as haabul maimanah)
"तो दाहिनी तरफ़ वाले [10], दाहिनी तरफ़ वालों का क्या कहना [11]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि ये वे मोमिनीन हैं जिन्हें अर्श के दाहिनी तरफ़ जगह मिलेगी, या जिनका आमाल-नामा उनके दाहिने हाथ में दिया जाएगा, या जो रोज़-ए-मीसाक़ हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की दाहिनी जानिब थे।
यह जुमला उनकी अज़ीम ख़ुशनसीबी और इज़्ज़त के इज़हार के लिए है कि सुब्हानअल्लाह! दाहिनी तरफ़ वालों की राहत और कामरानी का क्या कहना!
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