मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 10 तफ़सीर
मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)
सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 10
"और जो आगे बढ़ जाने वाले हैं [14], वे तो आगे ही बढ़ जाने वाले हैं!"
[14] साबेक़ून—नेकियों में आगे बढ़ जाने वाले मुक़र्रबीन
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:
साबेक़ून की जमाअत: ये वे मुक़द्दस हज़रात हैं जिन्होंने दुनिया में नेकियों, ईमान और अल्लाह की रज़ा में सबक़त हासिल की—जैसे सबक़त ले जाने वाले सहाबा-ए-किराम, मुहाजिरीन-ए-अव्वलीन, दोनों क़िब्ला की तरफ़ नमाज़ पढ़ने वाले, औलिया-ए-किराम और बा-अमल उलमा।
बे-हिसाब दाख़िला: ये हज़रात ऐसे बावक़ार होंगे कि शायद उन्हें आमाल-नामे का भी मोहताज न किया जाए और वे बिना हिसाब जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला तरीन मक़ाम पाएंगे।
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