Transliteration: (Wa as haabul mash'amati maaa as haabul mash'amah)
"और बाईं तरफ़ वाले [12], बाईं तरफ़ वालों का क्या पूछना (कितनी बुरी हालत) [13]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि ये वे बदबख़्त काफ़िर हैं जिनका आमाल-नामा उनके बाएँ हाथ में या पीठ के पीछे से दिया जाएगा, और जो अर्श के बाईं जानिब खड़े किए जाएँगे।
यह उनकी तबाही और हसरत को बयान करने के लिए है कि हाय! बाईं तरफ़ वालों की बदहाली और अज़ाब की शिद्दत का क्या पूछना!
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