कुरान - 56:9 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

9
وَأَصۡحَٰبُ ٱلۡمَشۡـَٔمَةِ مَآ أَصۡحَٰبُ ٱلۡمَشۡـَٔمَةِ

Transliteration: (Wa as haabul mash'amati maaa as haabul mash'amah)

और बाईं तरफ़ वाले [12], बाईं तरफ़ वालों का क्या पूछना (कितनी बुरी हालत) [13]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 9

"और बाईं तरफ़ वाले [12], बाईं तरफ़ वालों का क्या पूछना (कितनी बुरी हालत) [13]!"


[12] असहाबुल मशअमा (बाईं तरफ़ वाले काफ़िर व मुजरिम)

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि ये वे बदबख़्त काफ़िर हैं जिनका आमाल-नामा उनके बाएँ हाथ में या पीठ के पीछे से दिया जाएगा, और जो अर्श के बाईं जानिब खड़े किए जाएँगे।

[13] उनकी भयानक हलाकत और रुसवाई

यह उनकी तबाही और हसरत को बयान करने के लिए है कि हाय! बाईं तरफ़ वालों की बदहाली और अज़ाब की शिद्दत का क्या पूछना!

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