कुरान - 56:11 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلۡمُقَرَّبُونَ

Transliteration: (Ulaaa'ikal muqarraboon)

वही (बारगाह-ए-इलाही के) मुक़र्रब (निकटवर्ती) लोग हैं [15]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 11

"वही (बारगाह-ए-इलाही के) मुक़र्रब (निकटवर्ती) लोग हैं [15]!"


[15] मुक़र्रबीन की शान और अर्श-ए-इलाही व नबी ﷺ का क़ुर्ब

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि ये वे ख़ुशबख़्त हैं जिन्हें अर्श-ए-इलाही का क़ुर्ब और जन्नत में हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की हमसाएगी और रिफ़ाक़त का बेमिसाल शरफ़ हासिल होगा।

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