Transliteration: (Ulaaa'ikal muqarraboon)
"वही (बारगाह-ए-इलाही के) मुक़र्रब (निकटवर्ती) लोग हैं [15]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि ये वे ख़ुशबख़्त हैं जिन्हें अर्श-ए-इलाही का क़ुर्ब और जन्नत में हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की हमसाएगी और रिफ़ाक़त का बेमिसाल शरफ़ हासिल होगा।
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