Transliteration: (Wa bussatil jibaalu bassaa)
"और पहाड़ बिल्कुल चूर-चूर कर दिए जाएँगे [7]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि भारी-भरकम सख़्त चट्टानें और पहाड़ पहले धुनी हुई रुई के गालों की तरह उड़ेंगे, फिर पिसकर बारीक भुने हुए सत्तू की तरह चूर-चूर हो जाएँगे।
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