कुरान - 56:3 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
خَافِضَةٞ رَّافِعَةٌ

Transliteration: (Khafidatur raafi'ah)

किसी को पस्त करने वाली [4] और किसी को बुलंद करने वाली [5]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 3

"किसी को पस्त करने वाली [4] और किसी को बुलंद करने वाली [5]!"


[4] काफ़िरों और मुतकब्बिरीन की रुसवाई व ज़िल्लत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि क़यामत का दिन दुनिया के ज़ाहिरी सरदारों, मुतकब्बिरों और काफ़िरों को ज़लील व रुसवा करके जहन्नम के सबसे निचले गढ़े में फेंक देगा। जो दुनिया में बड़ाई मारते थे, वे वहाँ निहायत हक़ीर होंगे।

[5] अहले ईमान, उलमा और हुज़ूर ﷺ की अज़ीम बुलंदी

इसके बरअक्स अहले ईमान, सालेहीन, औलिया-ए-किराम और उलमा-ए-हक़ को अज़ीम इज़्ज़त व बुलंदी अता होगी। हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रदियल्लाहु अन्हुमा फ़रमाते हैं कि जो दुनिया में आजिज़ और मुनकसिरुल मिज़ाज रहे वे वहाँ बुलंद मक़ाम पाएंगे, और सबसे आला बुलंदी सुल्तान-ए-दोआलम हुज़ूर मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ के मुक़ाम-ए-महमूद की ज़ाहिर होगी।

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