Transliteration: (Ka amsaalil lu'lu'il maknoon)
"जैसे छुपाकर रखे हुए मोती [23]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जैसे सीप के अंदर महफ़ूज़ मोती को न कभी किसी का हाथ लगा हो और न हवा व गर्द ने छुआ हो—वह बिल्कुल चमकदार, साफ़ और बे-ऐब होता है—वैसे ही जन्नत की हूरें अपने हुस्न और पाकीज़गी में बे-दाग़ और कामिल होंगी।
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