कुरान - 56:25 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
لَا يَسۡمَعُونَ فِيهَا لَغۡوٗا وَلَا تَأۡثِيمًا

Transliteration: (Laa yasma'oona feehaa laghwanw wa laa taaseemaa)

वे उसमें न कोई बेहूदा बात सुनेंगे और न गुनाह का कलाम [25]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 25

"वे उसमें न कोई बेहूदा बात सुनेंगे और न गुनाह का कलाम [25]!"


[25] जन्नत की पाकीज़ा फ़ज़ा—लग़्व और गुनाह की बातों से पाक

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नत में किसी क़िस्म की ग़ीबत, झूठ, गाली-गलौज या बेहूदा बात न होगी। वहाँ हर तरफ़ रूहानी सुकून और पाकीज़गी का दौर-दौरा होगा।

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