कुरान - 56:27 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
وَأَصۡحَٰبُ ٱلۡيَمِينِ مَآ أَصۡحَٰبُ ٱلۡيَمِينِ

Transliteration: (Wa as haabul yameeni maaa as haabul Yameen)

और दाहिनी तरफ़ वाले, दाहिनी तरफ़ वालों का क्या कहना [26]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 27

"और दाहिनी तरफ़ वाले, दाहिनी तरफ़ वालों का क्या कहना [26]!"


[26] दाहिनी तरफ़ वालों का इकराम और सलाम

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नत में अहले यमीन (दाहिनी तरफ़ वाले नेक मोमिनीन) आपस में भी सलाम करेंगे, फ़रिश्ते भी उनका एहतराम करते हुए उन्हें सलाम पेश करेंगे, और ख़ुद परवरदिगार-ए-आलम अपनी रहमत से उन पर सलाम भेजेगा ("सलामून क़ौलम-मिर-रब्बिर-रहीम")। यह उनकी अज़ीम इज़्ज़त और आराम की अलामत है।

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