Transliteration: (Wa as haabul yameeni maaa as haabul Yameen)
"और दाहिनी तरफ़ वाले, दाहिनी तरफ़ वालों का क्या कहना [26]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नत में अहले यमीन (दाहिनी तरफ़ वाले नेक मोमिनीन) आपस में भी सलाम करेंगे, फ़रिश्ते भी उनका एहतराम करते हुए उन्हें सलाम पेश करेंगे, और ख़ुद परवरदिगार-ए-आलम अपनी रहमत से उन पर सलाम भेजेगा ("सलामून क़ौलम-मिर-रब्बिर-रहीम")। यह उनकी अज़ीम इज़्ज़त और आराम की अलामत है।
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