Transliteration: (Fee sidrim makhdood)
"वे बे-काँटे की बेरियों में होंगे [27]।"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि दुनिया में बेरी के दरख़्तों में काँटे होते हैं और फल कम होता है, मगर जन्नत की बेरियाँ काँटों से पाक होंगी और उन पर ऐसे लज़ीज़ और ख़ुशबूदार बेर लगेंगे जिनका गूदा ताज़ा मक्खन की तरह नर्म और इंतिहाई मीठा होगा। सिदरतुल मुंतहा भी बेरी का मुतबर्रक दरख़्त है जहाँ हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम का मक़ाम है।
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