Transliteration: (Wa zillim mamdood)
"और लंबे फैले हुए सायों में [29]।"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नत में धूप और गर्मी नहीं होगी, बल्कि सुबह सादिक़ के वक़्त जैसी दिलकश और दायमी ठंडक और सुहाना समां रहेगा। हदीस शरीफ़ में है कि जन्नत के दरख़्त 'तूबा' के साये में अगर कोई तेज़ सवार सौ साल भी दौड़ता रहे तो उसका साया ख़त्म न होगा।
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