कुरान - 56:30 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
وَظِلّٖ مَّمۡدُودٖ

Transliteration: (Wa zillim mamdood)

और लंबे फैले हुए सायों में [29]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 30

"और लंबे फैले हुए सायों में [29]।"


[29] हमेशा रहने वाला साया—त़ूबा दरख़्त की वुसअत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नत में धूप और गर्मी नहीं होगी, बल्कि सुबह सादिक़ के वक़्त जैसी दिलकश और दायमी ठंडक और सुहाना समां रहेगा। हदीस शरीफ़ में है कि जन्नत के दरख़्त 'तूबा' के साये में अगर कोई तेज़ सवार सौ साल भी दौड़ता रहे तो उसका साया ख़त्म न होगा।

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