कुरान - 56:31 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
وَمَآءٖ مَّسۡكُوبٖ

Transliteration: (Wa maaa'im maskoob)

और मुसलसल बहते हुए पानी में। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 31

"और मुसलसल बहते हुए पानी में।"


जन्नत के बहते चश्मे और आबशारें

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नत में नहरें और चश्मे मुसलसल बहते रहेंगे। उनका पानी बिना किसी गड्ढे या खाई के सतह-ए-ज़मीन पर रवांदवां होगा और जन्नती जहाँ चाहेगा, वहीं पानी का रुख़ मुड़ जाएगा।

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