Transliteration: (Wa maaa'im maskoob)
"और मुसलसल बहते हुए पानी में।"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नत में नहरें और चश्मे मुसलसल बहते रहेंगे। उनका पानी बिना किसी गड्ढे या खाई के सतह-ए-ज़मीन पर रवांदवां होगा और जन्नती जहाँ चाहेगा, वहीं पानी का रुख़ मुड़ जाएगा।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat