कुरान - 56:26 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
إِلَّا قِيلٗا سَلَٰمٗا سَلَٰمٗا

Transliteration: (Illaa qeelan salaaman salaamaa)

मगर यही बात कि सलाम! सलाम [26]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 26

"मगर यही बात कि सलाम! सलाम [26]!"


[26] सलाम ही सलाम—अमन व सलामती का पैग़ाम

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नत में फ़रिश्ते भी सलाम करेंगे, परवरदिगार की तरफ़ से भी सलाम होगा और अहले जन्नत भी आपस में मुहब्बत व एहतराम से 'सलाम-सलाम' कहेंगे। जन्नत अमन, सलामती और दायमी इज़्ज़त का घर है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now