कुरान - 56:21 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
وَلَحۡمِ طَيۡرٖ مِّمَّا يَشۡتَهُونَ

Transliteration: (Wa lahmi tairim mimmaa yashtahoon)

और परिंदों का गोश्त जो उन्हें पसंद हो [22]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 21

"और परिंदों का गोश्त जो उन्हें पसंद हो [22]!"


[22] परिंदों का भुना हुआ लज़ीज़ गोश्त और क़ुदरत-ए-इलाही

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नत में आग नहीं है, लिहाज़ा वहाँ का गोश्त आग पर नहीं पकाया जाएगा, बल्कि अल्लाह की क़ुदरत-ए-कामिला से जन्नती की ख़्वाहिश के मुताबिक़ निहायत ख़ुशबूदार और भुना हुआ तैयार होकर सामने आ जाएगा, जैसे हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के दस्तरख़्वान (माइदा) पर आसमानी ग़िज़ा नाज़िल होती थी।

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