Transliteration: (Wa lahmi tairim mimmaa yashtahoon)
"और परिंदों का गोश्त जो उन्हें पसंद हो [22]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नत में आग नहीं है, लिहाज़ा वहाँ का गोश्त आग पर नहीं पकाया जाएगा, बल्कि अल्लाह की क़ुदरत-ए-कामिला से जन्नती की ख़्वाहिश के मुताबिक़ निहायत ख़ुशबूदार और भुना हुआ तैयार होकर सामने आ जाएगा, जैसे हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के दस्तरख़्वान (माइदा) पर आसमानी ग़िज़ा नाज़िल होती थी।
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