कुरान - 56:34 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
وَفُرُشٖ مَّرۡفُوعَةٍ

Transliteration: (Wa furushim marfoo'ah)

और ऊँचे बिछौनों (तख़्तों) पर [32]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 34

"और ऊँचे बिछौनों (तख़्तों) पर [32]।"


[32] बुलंद मसनद और जन्नती राहतगाहें

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'फ़ुरुश' से मुराद निहायत बुलंद, नर्म और आरामदेह मसनद और बिछौने हैं जो सोने के तख़्तों पर बिछाए गए हैं। चूँकि जन्नत में नींद नहीं है, इसलिए ये बिछौने सोने के लिए नहीं बल्कि शाही मजलिसों और आराम के लिए हैं।

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