कुरान - 56:35 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
إِنَّآ أَنشَأۡنَٰهُنَّ إِنشَآءٗ

Transliteration: (Innaaa anshaanaahunna inshaaa'aa)

बेशक हमने उन (औरतों/हूरों) को ख़ास अंदाज़ पर पैदा फ़रमाया [33]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 35

"बेशक हमने उन (औरतों/हूरों) को ख़ास अंदाज़ पर पैदा फ़रमाया [33]!"


[33] हूरों और जन्नती बीवियों की अनोखी तख़्लीक़

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जन्नत की हूरें माँ के पेट से पैदा नहीं हुईं बल्कि अल्लाह तआला ने अपनी ख़ास क़ुदरत से उन्हें ज़ाफ़रान और कस्तूरी से पैदा फ़रमाया। इसी तरह दुनिया की जो ईमानदार औरतें जन्नत में जाएँगी, अल्लाह उन्हें भी निहायत हसीन, जवान और कामिल सूरत में दोबारा तख़्लीक़ फ़रमाएगा जिनकी जवानी कभी नहीं ढलेगी।

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