कुरान - 56:41 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

41
وَأَصۡحَٰبُ ٱلشِّمَالِ مَآ أَصۡحَٰبُ ٱلشِّمَالِ

Transliteration: (Wa as haabush shimaali maaa as haabush shimaal)

और बाईं तरफ़ वाले [38], बाईं तरफ़ वालों का क्या पूछना (कितनी बदहाली है) [39]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 41 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 41

"और बाईं तरफ़ वाले [38], बाईं तरफ़ वालों का क्या पूछना (कितनी बदहाली है) [39]!"


[38] असहाबुल शिमाल (काफ़िर और बदबख़्त)

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि ये वे काफ़िर व मुशरिक हैं जिनका आमाल-नामा उनके बाएँ हाथ में दिया जाएगा और जो अर्श के बाईं जानिब खड़े किए जाएँगे।

[39] उनके अज़ाब की हौलनाकी पर ताज्जुब

यह सवाल उनके अज़ाब की शिद्दत और बदहाली पर हैरत और इबरत दिलाने के लिए है कि उनकी तबाही का क्या पूछना!

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