कुरान - 56:50 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
لَمَجۡمُوعُونَ إِلَىٰ مِيقَٰتِ يَوۡمٖ مَّعۡلُومٖ

Transliteration: (Lamajmoo'oona ilaa meeqaati yawmim ma'loom)

"ज़रूर एक मुअय्यन दिन के वक़्त पर जमा किए जाएँगे [45]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 50

"'ज़रूर एक मुअय्यन दिन के वक़्त पर जमा किए जाएँगे [45]!'"


[45] यौम-ए-हश्र और यौम-ए-फ़स्ल

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि क़यामत का दिन अल्लाह के इल्म में बिल्कुल मुअय्यन है। पहले सब मख़लूक़ को एक जगह जमा किया जाएगा (इसलिए इसे यौमुल जमअ कहते हैं), फिर मोमिनों और काफ़िरों को अलग-अलग छाँट दिया जाएगा (इसलिए इसे यौमुल फ़स्ल कहते हैं), जैसा कि सूरह यासीन में फ़रमाया: "वम्ताज़ुल यौमा अय्युहल मुजरिमून"।

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