कुरान - 53:47 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
وَأَنَّ عَلَيۡهِ ٱلنَّشۡأَةَ ٱلۡأُخۡرَىٰ

Transliteration: (Wa anna 'alaihin nash atal ukhraa)

और यह कि दोबारा पैदा करना भी उसी के ज़िम्मा-ए-करम पर है [58]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 47

"और यह कि दोबारा पैदा करना भी उसी के ज़िम्मा-ए-करम पर है [58]!"


[58] दोबारा ज़िंदा किए जाने (हश्र) का रब्बानी वादा

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि जब पहली बार बिना किसी मिसाल के इंसान को पैदा फ़रमाया, तो मरने के बाद दोबारा ज़िंदा करना उस रब्बे-क़दीर के लिए भला क्या मुश्किल है! अल्लाह ने अपने करम से यह वादा फ़रमाया है और वह पूरा होकर रहेगा।

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