कुरान - 53:1 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
وَٱلنَّجۡمِ إِذَا هَوَىٰ

Transliteration: (Wannajmi izaa hawaa)

क़सम है चमकते हुए प्यारे सितारे (मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ) की, जब वे मेअराज से नीचे उतरे [2]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 1

"क़सम है चमकते हुए प्यारे सितारे (मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ) की, जब वे मेअराज से नीचे उतरे [2]!"


[2] 'नज्म' और 'हवा' के माना और हुज़ूर ﷺ की मेअराज से वापसी

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि लफ़्ज़ 'नज्म' के कई मानी मुफ़स्सिरिन ने बयान फ़रमाए हैं:

  • आसमानी सितारा: एक मानी यह है कि इससे मुराद आसमान का चमकता हुआ सितारा है, और 'हवा' से मुराद उसका डूबना या ढलना है।
  • ज़मीनी सब्ज़ा: दूसरा मानी यह है कि बे-तने की घास या सब्ज़ी जो ज़मीन पर फैलती है।
  • हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की ज़ात-ए-मुबारका: सबसे बेहतरीन और पसंदीदा तफ़सीर यह है कि 'नज्म' (चमकता सितारा) से मुराद ख़ुद हुज़ूर नबी-ए-करीम मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की ज़ात-ए-मुकद्दसा है, और 'हवा' से मुराद शब-ए-मेअराज अर्श-ए-इलाही और आसमानों की सैर फ़रमाकर ज़मीन पर तशरीफ़ लाना है।
  • तफ़सीर ख़ज़ाइनुल इरफ़ान व रूह-उल-मआनी: यह तफ़सीर इसलिए मुक़द्दम है क्योंकि अगली तमाम आयतों में हुज़ूर ﷺ के मेअराज, आपके बुलंद मर्तबे और दीदार-ए-इलाही का तफ़सीली बयान है।

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