कुरान - 53:3 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
وَمَا يَنطِقُ عَنِ ٱلۡهَوَىٰٓ

Transliteration: (Wa maa yyantiqu 'anilhawaaa)

और वे अपनी ख़्वाहिश-ए-नफ़्स से कुछ नहीं बोलते [4]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 3

"और वे अपनी ख़्वाहिश-ए-नफ़्स से कुछ नहीं बोलते [4]!"


[4] नबी ﷺ का मुबारक कलाम रब्बानी वह्य है

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि यह आयत पिछली आयत की क़तई दलील है:

  • फ़ना फ़िल्लाह का मक़ाम: जो ज़ात अल्लाह तआला की मारिफ़त और कुर्ब में इस दर्जे पर फ़ाइज़ हो कि अपनी तमाम ख़्वाहिशात को अल्लाह की रज़ा के ताबे कर चुकी हो, वह भला कैसे बहक सकती है!
  • आग में तपे हुए कोयले की मिसाल: जिस तरह कोयला जब आग में पूरी तरह तपकर लाल अंगारा बन जाता है, तो वह आग ही का काम करता है; उसी तरह हुज़ूर ﷺ जब अनवार-ए-इलाही में मुकम्मल तौर पर डूबे हुए हैं, तो आपकी ज़बान-ए-मुबारक से निकलने वाला हर लफ़्ज़ अल्लाह ही की मर्ज़ी और हुक्म का इज़हार होता है।

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