कुरान - 53:4 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
إِنۡ هُوَ إِلَّا وَحۡيٞ يُوحَىٰ

Transliteration: (In huwa illaa Wahyuny yoohaa)

वह तो सिर्फ़ वह्य [5] है जो उनकी तरफ़ भेजी जाती है! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 4

"वह तो सिर्फ़ वह्य [5] है जो उनकी तरफ़ भेजी जाती है!"


[5] वह्य-ए-जली (क़ुरआन) और वह्य-ए-ख़फ़ी (हदीस) और नबी ﷺ के आफ़आल

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि हुज़ूर ﷺ का हर क़ौल और अमल रब्बानी वह्य के ताबे है:

  • वह्य की दो किस्में:
    • वह्य-ए-जली: क़ुरआन मजीद जिसके अल्फ़ाज़ और मानी दोनों अल्लाह की तरफ़ से नाज़िल हुए।
    • वह्य-ए-ख़फ़ी: अहादीस-ए-मुबारका जिनके मानी अल्लाह की तरफ़ से इलहाम हुए और अल्फ़ाज़ हुज़ूर ﷺ के मुबारक लबों से अदा हुए।
  • हुज़ूर ﷺ के आफ़आल रब के आफ़आल: क़ुरआन में अल्लाह ने फ़रमाया: "जब आपने कंकरियाँ फेंकीं, तो वह आपने नहीं बल्कि अल्लाह ने फेंकीं" (सूरह अनफ़ाल)। और बैअत के वक़्त फ़रमाया: "बेशक जो लोग आपकी बैअत करते हैं, वे अल्लाह ही की बैअत करते हैं"।
  • सल्तनत-ए-मुस्तफ़ा: इस अज़ीम मौज़ू की मज़ीद तफ़सील के लिए मुफ़्ती साहब की किताब 'सल्तनत-ए-मुस्तफ़ा' का मुतालआ फ़रमाएँ।

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