कुरान - 53:2 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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مَا ضَلَّ صَاحِبُكُمۡ وَمَا غَوَىٰ

Transliteration: (Maa dalla saahibukum wa maa ghawaa)

तुम्हारे साहिब (मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ) न बहके हैं और न बे-राह चले हैं [3]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 2

"तुम्हारे साहिब (मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ) न बहके हैं और न बे-राह चले हैं [3]!"


[3] हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की कामिल हिदायत और इस्मत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला ने अपने महबूब ﷺ की इस्मत और हिदायत की गवाही दी:

  • 'मा ज़ल्ला साहिबुकुम' (तुम्हारे साहिब न बहके): यानी ऐ अहले-मक्का! जिन्हें तुम बरसों से सादिक़ व अमीन जानते हो, वे कभी न हक़ से भटके हैं और न किसी ग़लत राह पर चले हैं।
  • इस्मत-ए-अंबिया: आम इंसान भूल-चूक या नफ़्सानी ख़्वाहिशात की वजह से ख़ता कर सकता है, मगर हुज़ूर अकरम ﷺ अल्लाह की ख़ास हिफ़ाज़त (इस्मत) में हैं। आपकी हर बात, हर अमल और हर फ़ैसला सरासर हक़ और हिदायत पर मबनी है।

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