कुरान - 53:7 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
وَهُوَ بِٱلۡأُفُقِ ٱلۡأَعۡلَىٰ

Transliteration: (Wa huwa bil ufuqil a'laa)

और वे (मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ) आसमान के सबसे बुलंद किनारे पर थे [8] (ताकि रब्बे-क़रीम का दीदार करें)! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 7

"और वे (मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ) आसमान के सबसे बुलंद किनारे पर थे [8] (ताकि रब्बे-क़रीम का दीदार करें)!"


[8] उफ़ुक़-ए-आला और जिस्मानी मेअराज का मक़ाम

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि यह आयत हुज़ूर ﷺ के जिस्मानी मेअराज का वाज़ेह सुबूत है:

  • सातों आसमानों से ऊपर: हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ अपने मुक़द्दस जिस्म के साथ सातों आसमानों को पार करके सिदरतुल-मुन्तहा और अर्श-ए-इलाही के सबसे बुलंद किनारे (उफ़ुक़-ए-आला) पर पहुँचे।
  • जिब्रील-ए-अमीन का ठहर जाना: सिदरतुल-मुन्तहा पर हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) यह कहकर रुक गए कि अगर मैं एक बाल बराबर भी आगे बढ़ूँगा तो अनवार-ए-इलाही मेरे परों को जला देंगे। मगर हुज़ूर ﷺ उस मुक़ाम से भी आगे तशरीफ़ ले गए जहाँ कोई मख़लूक़ आज तक नहीं पहुँची।
  • तफ़सीर कबीर व रूह-उल-बयान: हज़रत हसन बसरी (रह.) और तमाम जलीलुल-क़द्र मुफ़स्सिरिन ने इसकी तसदीक़ फ़रमाई है।

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