Transliteration: (Wa samooda famaaa abqaa)
"और समूद को भी, फिर उनमें से किसी को बाक़ी न छोड़ा [61]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि यह हज़रत सालेह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम थी जिसे हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) की एक भयानक चीख़ और लरज़े से तबाह कर दिया गया और उनका नामो-निशान मिटा दिया गया।
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